नौ घंटे चली सर्जरी में 30 मिनट रोकी ब्लड की सप्लाई। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर ने महाधमनी में बने एन्युरिज्म को जटिल सर्जरी द्वारा किया रिपयेर |

जयपुर। नारायणा हॉस्पिटल, जयपुर के कार्डियक सर्जन्स ने सफलतापूर्वक महाधमनी के असामान्य रूप से बढ़ जाने की समस्या (महाधमनी एन्युरिज्म) से पीड़ित एक महिला की अत्यधिक जटिल मानी जाने वाली सर्जरी (बेंटाल सर्जरी विद हेमी आर्च रिपेयर) की है। महाधमनी वह मुख्य रक्त वाहिका है जो शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति करती है। ऑपरेशन के दौरान 30 मिनट तक मरीज के पूरे शरीर की ब्लड सप्लाई रोकने जैसी जोखिम उठाने वाली यह सर्जरी करना हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी टीम की एक बड़ी उपलब्धि हैं। देश के कुछ ही सेन्टर्स पर इस तरह की सर्जरी की जाती है। 

एओर्टिक एन्युरिज्म दुर्लभ बीमारी थी
44 साल की कांतादेवी (बदला हुआ नाम) को काफी दिनों से शरीर में दर्द, उल्टी और भूख की कमी की शिकायत थी। जब उनकी जांचे हुई तो पता लगा कि उन्हें महाधमनी एन्युरिज्म (जिसमें महाधमनी असामान्य रूप से बढ़ जाती है) की शिकायत थी। साथ ही उनके एक वॉल्व में भी खराबी थी। महाधमनी के ‘रूट से आर्च भाग’ तक एन्युरिज्म बन जाने से स्थिति और जटिल हो जाती है क्योंकि आर्च से दिमाग को रक्त प्रवाह पहुंचाने वाली नसें जुड़ी होती हैं। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल के सीनियर कार्डियक सर्जन डॉ. अंकित माथुर ने बताया कि बेंटाल सर्जरी उच्चतम कार्डियक सेंटर्स पर ही की जाती है। लेकिन हेमी आर्च रिप्लेसमेंट के साथ बेंटाल सर्जरी करना और भी दुर्लभ मामला है जिसमें मृत्यु की संभावना अधिक होती है।

9 घंटे की सर्जरी, रोकनी पड़ी ब्लड सप्लाई 
नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के सीनियर कर्डियक सर्जन डॉ अंकित माथुर ने बताया कि ऐसी सर्जरी में विस्तृत सर्जिकल प्लानिंग की आवश्यकता होती है, क्योंकि सर्जरी के दौरान दिमाग की रक्त आपूर्ति का ध्यान भी रखना होता है। करीब 9 घंटे तक चली इस सर्जरी में शरीर का तापमान धीरे-धीरे 18 से 20 डिग्री सेल्सियस तक कम किया गया। सर्जरी के दौरान जब महाधमनी के ‘आर्च वाले भाग’ की मरम्मत की गई तो लगभग 30 मिनट के लिए शरीर की पूरी ब्लड सप्लाई को रोकना पड़ा। ऐसे में ब्रेन की कार्यप्रणाली बनाये रखने के लिए बांह की नसों के जरिए ब्रेन को कुछ मात्रा में ब्लड सप्लाई किया जाता रहा। 9 घंटे चलने वाली इस सर्जरी में, महाधमनी के रोगग्रस्त हिस्से को सिंथेटिक ग्राफ्ट से बदला गया और शरीर में रक्त प्रवाह को समान्य बनायें रखने के लिए नसों को फिर से जोड़ा गया। 

हालांकि यह स्थिति असामान्य एवं नाजुक थी, परन्तु समय रहते योजनाबद्ध तरिके से सर्जरी कर मरीज की जान बचाई गई। नारायणा हॉस्पिटल में उन्नत उपचार सुविधाओं एवं अनुभवी विशेषज्ञ टीम के कारण यह संभव हो पाया। 

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